खाडुभाई

पहाड़ों से खरी खरी

सेब आन्दोलन और शांता कुमार

Posted by NITYIN on August 25, 2009

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कोटगढ़ यात्रा

Posted by NITYIN on August 17, 2009

लीजिये यात्रा का पूरा वृतांत प्रस्तुत है. कल का दिन खूब व्यस्त गुजरा. सुबह सेब की तुडाई शुरू हो गयी और मैं यहीं गोदाम में सेब इकट्ठे करता रहा. यह सिलसिला २ बजे तक चला. फिर बारिश शुरू हो गयी और तुडाई का काम रोक दिया गया. इस बीच में वरुण चित्र खींचते रहे और मेरे साथ गोदाम में बतयाते रहे. वैसे सुबह भी वह काफी जल्दी उठ कर सैर पर निकल गए थे. हालाँकि चित्र ज्यादा न खींच पाए क्योंकि धुंध खूब थी. हम तो भैय्या लम्बी तान कर सोये पड़े थे.

खैर दोपहर को हम दोनों निकल पड़े. कार्यक्रम उनको कोटगढ़ घुमाने का था. थोडी दूर निकले तो दूर बहती सतलुज देख कर नदी किनारे जाने का कार्यक्रम बन गया. सतलुज के किनारे बिथल पहुंचे तो पता चला उनके पिता रामपुर में भी नियुक्त रहे थे सो हम चल दिए रामपुर की और. बिथल से रामपुर केवल २५ किलोमीटर की दूरी पर है. आधे घंटे बाद हम रामपुर में थे. उनको बाजार घुमाया. १५ अगस्त होने के कारण शाम के समय ज्यादा चहल पहल न थी. कुछ समय उनके पिता की कर्म भूमि में बिताने के बाद हम वापस घर चल पड़े. पहुँचते पहुँचते रात के ८ बज गए थे.

आज सुबह गलती से मैं ६ बजे उठ गया. देखा तो श्रीमान सोये पड़े थे. बाहर वैसे भी बारिश हो रही थी सो उनको जगाया नहीं. सुबह से हलकी बारिश होती रही इस लिए बाहर जाना हो नहीं पाया. १ बजे तो जैसे तैसे हम बारिश में चल पड़े. पहले उनको थानेधार लेकर गया, वहां से Banjara Orchard Retreat और फिर कोटगढ़ की वादियों के दर्शन करवाए. दिन का भोजन Banjara में हुआ. घर पहुँचते शाम के ६ बज गए. बारिश अब भी नहीं थमी थी. कुछ देर आराम करने के बाद हम शाम की सैर को निकल गए हल्की मद्धम बारिश में. लौटे तो अँधेरा हो चूका था. भोजन के बाद वरुण सोने चले गए. कल सुबह ६ बजे शिमला के लिए निकलना जो है. सुबह मेरे छोटे भाई जी विक्की भी शिमला आ रहे हैं. उनके साथ ही आने का कार्यक्रम है. यहाँ कुछ चित्र जो मैंने खींचे पोस्ट कर रहा हूँ. आप लोग भी मेरे गाँव का मजा लें.

सतलुज पानी के वेग से हम दोनों ही पुल पर जाने की हिम्मत न कर पाए

कोटगढ़ घाटी का एक दृश्य मीलों दूर तक दिखते सेब के बगीचे 023

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वरुण गहरी चर्चा में शिकारी खुद शिकार होते हुए :)

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